https://prachodayat.in/rishis-way-make-run-path-dharma/
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ऋषि जब दिव्य प्रकाश से जाग्रत और ऊर्जित होते हैं,
तो वे क्या करते हैं?
क्या वे अपने अनुभव को लिखकर ग्रंथ रचते हैं? – नहीं।
क्या वे वाद–विवाद करके अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं? – नहीं।
क्या वे किसी सभा में जाकर अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते हैं? – नहीं।
वे तो अज्ञात पथ पर प्रथम पग धरते हैं।
मार्ग–सृजन करते हैं।
अपनी प्राप्ति का अमृत समस्त मानव–जाति में बाँटते हैं।
और फिर जगत उस जीवन–धारा को अपने समय का धर्मशास्त्र मानकर लिखता है।
ऋषि हमें धर्म–मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
मनुष्य होने के परम ध्येय की सिद्धि कराने हेतु हमें गतिशील बनाते हैं।
