दाड़िम, मूलाधार और संतान-शक्ति
एक नवीन स्वास्थ्य सर्वेक्षण ने ऐसा तथ्य सामने रखा है जो हृदय को झकझोर देता है। भारत में इकतीस से चालीस वर्ष की आयु वाले नर-नारियों में लगभग छियालीस प्रतिशत को संतान प्राप्ति हेतु वैद्यकीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है। कारण यह कि दोनों में से कोई एक, अथवा दोनों ही, प्रजनन की बाधा से ग्रस्त हैं।

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बदलता कर्म-क्रम
यह बदलते व्यवसाय-क्रम का दुष्परिणाम है। आज का युवा अधिकांशतः स्थिर आसन वाले कर्म में बँधा है। आठ घंटे से अधिक वह संगणक के सम्मुख बैठा रहता है। ऐसा होना अवश्यंभावी है। उस पर नियमित मद्यपान, धूम्रपान और मादक द्रव्यों का सेवन — शरीर की मूल शक्ति कैसे अक्षुण्ण रहती?
तो उपाय क्या है?
गणेश, पार्वती और मूलधार
गणेश और माँ पार्वती की आराधना करो। गणेश संतानोत्पत्ति के अधिपति हैं। माँ पार्वती वही शक्ति हैं जो प्रजनन से जुड़ी है। शरीर में उनका आसन मूलधार चक्र है — वह ऊर्जा-केंद्र जो उसी क्षेत्र का शासन करता है जहाँ प्रजनन अंग स्थित हैं।
गणेश के कर में दाड़िम है। संस्कृत में इसे बीजपूर कहते हैं — शाब्दिक अर्थ, बीजों से परिपूर्ण। यह समृद्धि और संतान-शक्ति का संकेत है। यह भूमिदेवी और भगवान गणेश दोनों से जुड़ा है। गणेश को बीजपूरफलसक्त भी कहा गया है — अनेक बीजों वाले फल के प्रेमी।
जब तुम उन पर ध्यान करते हो, तो दोषयुक्त प्रजनन अंगों में सोई ऊर्जा-केंद्र जाग्रत होते हैं। संतान उत्पन्न करने की दिव्य शक्ति पुनः प्राप्त होती है।
एक स्मरण और। गणेश की दस दिवसीय आराधना के ठीक पश्चात् नवरात्र में माँ पार्वती की दस दिवसीय उपासना आने वाली है। ध्यान रहे — वर्ष का यह सर्वाधिक प्रभावशाली काल है माँ पार्वती की आराधना का।
इस ऋतु का फल
इस ऋतु में दाड़िम का सेवन करो। अनेक बीजों के कारण यह फल संतानोत्पत्ति, जन्म और शाश्वत जीवन से जुड़ा माना गया है।
आधुनिक विज्ञानशाला में यह देखा गया कि दाड़िम के नियमित सेवन से मैलोनडाइएल्डिहाइड (MDA) के स्तर में उल्लेखनीय कमी आई तथा ग्लूटाथियोन (GSH), ग्लूटाथियोन पेरोक्सीडेज (GSH-Px), कैटालेस (CAT) की सक्रियता और विटामिन सी का स्तर बढ़ा। सेवन से शुक्रनलिका में शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गतिशीलता, शुक्रजनक कोशिकाओं का घनत्व, शुक्रजनक नलिकाओं का व्यास और जनन-कोशिका स्तर की मोटाई बढ़ी। विकृत शुक्राणुओं की दर नियंत्रण वर्ग की तुलना में घटी।
http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/18222572
वंध्यता का एक सामान्य कारण अतिमेद है। दाड़िम का सेवन मेद को कम करता है। इसके अनेक हितकारी प्रभाव एंथोसायनिन, टैनिन तथा पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉइड जैसे उच्चस्तरीय प्रतिऑक्सीकारकों की उपस्थिति से जुड़े हैं।
http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/22342388
संस्कृति को संजोओ
अपनी संस्कृति को संजोओ। प्रकृति माता से जुड़े पर्वों को मानो। पर्व केवल विनोद के लिए मत मनाओ। ऋतु-परिवर्तन के अनुसार ईश्वर के भिन्न रूपों की आराधना करो और आध्यात्मिक निर्देशों का पालन करो। अंतर्निहित ईश्वर निश्चय ही तुम्हें स्वस्थ रखेगा, ताकि तुम अपने, परिवार और राष्ट्र के प्रति लौकिक कर्तव्य निभा सको।
मुझे हमारी प्रवृत्ति ज्ञात है। ईश्वर से जुड़ी बात आते ही उपेक्षा हो जाती है। यद्यपि यह लेख भगवान गणेश पर है, मैंने उनका चित्र नहीं रखा — ताकि अधिक लोग इसे पढ़ सकें।
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गणेश उपासना मंगलमय हो। गणेश की शक्ति हमारे शरीर में विलीन हो और प्रत्येक कोशिका गणेशमय हो जाए। शुभकामनाएँ।
अगली बार जब इस अद्भुत फल को खाओ, तब भगवान गणेश का स्मरण करना। प्रभाव अनेकगुण बढ़ जाएगा। मेरे वचन पर विश्वास करो — और स्वयं प्रयोग कर देखो।
