Pinda-Brahmand Reflection and Eclipse

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8 नवम्बर 2022 चन्द्र ग्रहण

ग्रहण – साधना – स्वास्थ्य

यथा पिण्ड तथा ब्रह्मांड

जैसा पिण्ड है वैसा ही ब्रह्मांड है ।

ब्रह्मांड से पिण्ड का अस्तित्व है तो निश्चित पिण्ड को ब्रह्मांड की बदलती अवस्था के साथ ताल से ताल मिलाना स्वयं के अस्तित्व के लिए आवश्यक है । ब्रह्मांड की अवस्था के अनुसार पिण्ड को ढालना अर्थात पिण्ड की दिनचर्या, ऋतुचर्या, व्रतचर्या, उत्सवचर्या आदि।

एक ऐसी ही ब्रह्मांड अवस्था है ग्रहण। कभी सूर्य ग्रहण तो कभी चंद्र ग्रहण। कभी अग्निसोमात्मक ब्रह्मांड का अग्नि पहलू प्रभावी तो कभी सोम प्रभावी। जब जगद आत्मा और जगत मन एक दुसरेसे श्रेणीबद्ध हो एकरूप हो, तो इससे अधिक प्रबल साधना समय और कोई नहीं! इसीलिए ..अपने आपको ग्रहण के समय लौकिक व्यवहारसे दूर कर, साधनासे मन और आत्मा को एकरूप करना चाहिए|

यह बात का वैज्ञानिक तथ्य सोचने से अच्छा है श्रद्धा से, “यथा पिण्ड तथा ब्रह्मांड ” सिद्धांत के आधार से साधना में लगे रहना चाहिए।

जप,तप,यज्ञ

When aatma and mind of the universe are aligned, it is most auspicious time to align fragment of the same aatma and mind under our possession.

Eclipse is not the time to engage in worldly affairs but re position self to self by Sadhana (जप,तप,यज्ञ).


यदि विज्ञान ही समझना है तो समझो के अग्नि या सोम के किसी एक का प्रभावी होना अर्थात उन पर निर्भर जीव सृष्टि के पोषण में असंतुलन। जैसे ऋतु संधिकाल साधना समय है वैसे ही ग्रहण समय निवृत्ति समय है ।

What do Hindu texts prescribe on eclipse event?
Fasting – No water, no food. River bath.
Lab results show that pathogens causing allergy, toxins increase during eclipse time. Effect last for 7-10 days.[1]

Science for whom 97% of microbial matter is dark(unknown), will ignore impact of eclipse on it. Until science proves the impact, follow your shastra and parampara with shraddha.

सूर्य – विराट् आत्मन् (कारण शरीर)
चंद्र – विराट् मनस (सूक्ष्म शरीर)
पृथ्वी – विराट् देह (स्थूल शरीर)

[1] https://link.springer.com/article/10.1007/BF02694497

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