
तव भ्राता मम सखा सम्बन्धी शिष्य एव च।
मांसान्युत्कृत्य दास्यामि फाल्गुनार्थं महीपते॥
‘हे राजन्! आपके भाई अर्जुन मेरे मित्र हैं, सम्बन्धी हैं और शिष्य हैं। मैं अर्जुन के लिये अपने शरीर का मांस तक काटकर दे सकता हूँ।’
भक्त और शिष्य की भूमिका में हो तो आप के रक्षण हेतु साक्षात परमेश्वर खड़े रहते है! अपने शरीर का मांस तक काटकर दे सकते है!
कृष्ण के सखा बनने की पात्रता निर्माण करो! नरत्व निर्माण करो!
