Ideal Father – Accessible like fire

Marut

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Being accessible like fire

Accidental or accessible?

***स नः पितेव सूनवे.अग्ने सूपायनो भव |***

*सचस्वा नः सवस्तये ||*

***हे अग्नि , कृपया आप हमें उपलब्ध होईये , जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र को होता है , हे अग्नि आप हमारे भले के लिए हमारे साथ रहिये***

वैदिक अग्नि स्तुति में अग्नि देव की आदर्श पिता के साथ तुलना की गई है । आदर्श पिता कैसा? जो अपनी संतति के विकास के काल में सदैव उपलब्ध हो ।

क्या हम सदैव उपलब्ध पिता है या अकस्मात से बने पिता है जो की संतति के साथ एक मात्र भोग\काम\स्वार्थ वश जुड़ा है ? हम सबको लगता है की हम तो आदर्श ही है । और हम अपने बच्चे को सच्चा प्रेम ही करते है । परंतु यह हमारी बातों से नहीं आचरण से निश्चित होता है । जब बच्चे बुलाते है तो क्या हम सब कुछ छोड़कर उनकी बात सुनते है? दिन में कितनी बार उनसे आँख में आँख डालकर बात करते है?

When Vedic hymn prays to the sacred fire, it compares it with the ideal father.

Agni should be accessible as father should be accessible to kids. Ideally, father play significant role in shaping strength of kids. Unfortunately, most modern fathers are accidental..1 night mistake kind of. They don’t care anything but their career and fiat money balance.

When kids are neglected by father between age 4 to 8, they miss significant life-lessons. They miss foundation of life-discipline.

Let us strive not to be accidental father! Good day ahead!

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