चातुर्मास और अग्नि स्वरूप

Marut

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अंगारे भी अग्नि है और अग्नि की भभूकती शिखा भी अग्नि ही है ।

4 महीने के लिए देव शयन में है । अग्नि जीवंत है परंतु मंद है क्यूंकी ब्रह्मांड में तीव्र है । दोनों अवस्था का अपना महत्व है । जो कार्य अंगारे कर सकते है वह शिखा नहीं कर सकती । जो कार्य शिखा कर सकती है वह अंगारे नहीं ।

चातुर्मास अर्थात, अंगारों पर तपना है । मानसिक श्रम बढ़ाना है । शास्त्र अभ्यास करना है । देवों के उठने तक स्वयं देव तुल्य जीवन बनाना है । नाम जप करना है ।

देवश्याना से देवोत्थान एकादशी (2 months of monsoon, 2 months of post-monsoon sharad): स्वाध्याय, संशोधन, स्वधर्म, स्वाहा, स्वधा ,व्रत, उपवास

देवोत्थान से देवश्याना एकादशी(8 months of हेमंत,शिशिर,वसंत,ग्रीष्म) : गृहसंसार, अर्थ-उपार्जन, समाजलक्षी कर्म, राष्ट्र सेवा, यात्रा-प्रवास , अखाडा, खेल-क्रीडा, उत्सव

विष्णु is the sustaining force in our body as a reflection of the universe. (यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे) देव उठनी #एकादशी when he takes control back from body-mind running on auto-pilot for 4 months!

For चातुर्मास (वर्षा,शरद), change in activities is prescribed. Mainly such activities which supports auto-pilot mode and does not put stress on dormant senses.

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