
*शंखनाद से निद्रा श्वास अवरोध चिकित्सा*
10 वर्ष पूर्ण एक लेख लिखा था – शंख नाद से उत्पन्न ध्वनि तरंग, विशेष अग्निपाक निर्माण करता है (microbes)।
आज एक संशोधन पढ़ा जिसमे शंख वादन से स्वास्थ्य सुधार की बात की है।
शंख वादन सदियों से हिन्दू धर्म के अनुष्ठानों में अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे पवित्रता, सकारात्मक ऊर्जा और आह्लाद के प्रतीक के रूप में माना जाता है। हाल ही में वैज्ञानिक अनुसंधान ने इस प्राचीन परंपरा के स्वास्थ्य लाभों को भी उजागर किया है।
दीवास्वप्न अर्थात दिन में सोना आयुर्वेद में वर्जित है। दिन में आलस और नींद का एक कारण रात्री की अधूरी निद्रा। रात्री में, यदि आप को sleep apnea है तो नींद नहीं आती। पूरे दिन थकावट रहेगी।
दैनिक रूप से शंख फूँकने से उन लोगों में जिनमें मध्यम स्तर की ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया (OSA) थी, उन्हें बेहतर नींद आई और दिन में उनींदापन (daytime sleepiness) कम हुआ।
जब हम शंख फूँकते हैं, तो पूरा एक छोटा-सा प्राणायाम होता है—गहरी साँस अंदर, और फिर पूरा जोर लगाकर स्थिर ध्वनि बाहर। इससे फेफड़े, गला, तालू सब मजबूत होते हैं। जो नींद में ढीले होकर साँस रोकते हैं, वो धीरे-धीरे टोन में आ जाते हैं। हिंदू परंपराओं में शंख वादन की ध्वनि को “ॐ” का आदिम स्वर माना गया है—जो वेदों के मूल में है, और सृष्टि के आरंभ और सत्य का प्रतीक भी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह प्रमाणित हो रहा है कि सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं, भौतिक रूप से यह वायुमार्ग की मांसपेशियों को मजबूत कर नींद की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। हमारे पूर्वजों की ज्ञानपूर्ण जीवनशैली ने वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित यह सिद्ध कर दिया है कि हिंदू अनुष्ठान न केवल निष्ठा से जुड़े होते हैं, बल्कि सामूहिक सुख और स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देते हैं।
2016 Article @ Prachodayat
https://prachodayat.in/conch-shell-sound-microbes/
Latest Research
Efficacy of blowing shankh on moderate sleep apnea: a randomised control trial
https://publications.ersnet.org/content/erjor/early/2025/06/05/2312054100258-2025
