Vibrational Universe and our health

Nisarg Joshi

SeasonDrivenLife

Trigger

2019-05-23 09_14_41-

Hindi

पर्यावरणीय कंपन प्राकृतिक या मानव निर्मित हैं। मानवीय स्वास्थ्य का पूरा खेल यह कंपनों से तालमेल का ही है। मानव निर्मित कंपनों से किनारा करना भी अपने आप में, स्वास्थ्य हेतु लिया बड़ा कदम होगा।

इन स्पंदनों में अराजकता ही मनुष्यों को युद्ध, महामारी, प्राकृतिक आपदा की ओर ले जाती है।

आप अपनी आंतरिक शक्ति और इन कंपनों से कितना अधिक तारतम्य साध सकते हो उसके आधार पर जीवित रहते हैं या मर जाते हैं, न कि किसी फ्लू के टीके या दवा के कारण।

हम केवल मूल कारण पर ही रोक सकते हैं। पर्यावरण को स्थिर करें और अपने आंतरिक तंत्र, शरीर और मन को मजबूत करें।

मैंने आपको कुछ समय पहले कहा था कि, शरद ऋतु की तरह, जेठ का यह महीना हमेशा मारक महीना होता है। चाहे गर्मी की लहर हो या महामारी। इतना ही नहीं हर 15 दिन में जब ऋतु परिवर्तन होता है। यह वह समय है जब मनुष्य को माँ प्रकृति में बाधा नहीं डालनी चाहिए और अपनी गतिविधियों को धीमा कर देना चाहिए। लेकिन हम अब कर्मकांडों में विश्वास नहीं करते। इसकी देखभाल के लिए अनुष्ठान की योजना बनाई गई थी। और कुछ नहीं तो एकादशी उपवास का पालन करना शुरू कर दें। अमावस्या और पूर्णिमा को छुट्टी लें। इससे मदद मिलेगी। यह अंधविश्वास नहीं बल्कि प्राकृतिक लय के साथ स्वास्थ्य के अनुकूल तालमेल है।

English

Environmental Vibrations are natural or man-made.Chaos leads to epidemics.
You survive or die based on your internal strength and not due to some flu vaccine or medicine.

This is fundamental of great health. Think over it. Even this much awareness will help your body to remain in optimum state.

Three factors (which are in our control with some practice and व्रत) control environmental vibrations responsible for sickness or total health : Food, Sleep and ब्रह्मचर्य – we only have these 3 weapons!

Epidemics are not new phenomenon.Give it different names or identify by different virus structures but the events are natural responses of our environment and are here since any living organism existed on the earth.

Fear not. Fear won’t help you prevent.

We can only prevent at root cause. Stabilize environment and strengthen your internal system, body and mind.

I told you sometime back that this month of जेठ is always a killer month. Be it heat-wave or epidemics. Not only this month, each 15 days when there is seasonal change. It is the time when humans must not hamper mother nature and slow down own activities. But we no more believe in rituals. Rituals were planned to take care of it. If nothing else, start following Ekadashi upavasa. Take holiday on Amavasya and Purnima. It will help. It is not superstition but a pro-health sync up with natural rhythms.

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