मातृत्व भाव दीर्घायुता प्रदान करता है

Marut

Dharma

हाल में वैज्ञानिकों ने यह देखा कि स्त्रियाँ सामान्यतः पुरुषों से अधिक आयु क्यों जीती हैं। अनेक कारण बताए जाते हैं, परन्तु एक महत्त्वपूर्ण आधार है- मातृत्व

मातृत्व केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहरी जीवन-शक्ति को जगाने वाला रूपांतरण है। यह रूपांतरण शरीर, मन और प्राण-तीनों को दीर्घायु की दिशा में ले जाता है।

यह हमारा सार्वभौमिक दुर्भाग्य है की आजकल दो प्रचलित विचारधाराने समाज से मातृत्व के भाव का सार्वत्रिक नाश किया है। एक है – महिला द्वारा मातृत्व से अधिक व्यवसाय को महत्व देना। दूसरा, मातृत्व मात्र जैविक माता तक सीमित रखना। वास्तव में, बालविकास में जैविक माता के साथ पिता, परिवार और समाज के मातृत्व की भी अपेक्षा है।

मातृत्व और मातृत्व-मानसिकता से मिलने वाले आयु-वृद्धि संकेत की सूची

  1. गर्भधारण से प्रतिरक्षा-सुधार और कोशिकीय सुरक्षा बढ़ती है — जैविक वृद्धावस्था धीमी होती है।
  2. मातृत्व-हार्मोन ऊतक-नवीकरण बढ़ाते हैं — दीर्घकालिक स्वास्थ्य को मजबूती मिलती है।
  3. माँ जैसी उत्तरदायित्व-मानसिकता तनाव-क्षति को घटाती है — तनाव वृद्धावस्था को तेज करता है।
  4. स्नेह-आधारित व्यवहार तंत्रिका-प्रणाली को स्थिर करता है — मानसिक क्षय धीमा होता है।
  5. देखभाल-प्रधान जीवन-शैली (caregiving effect) — दीर्घायु से लगातार जुड़ी मिलती है।
  6. भावनात्मक बंधन longevity-chemicals बढ़ाते हैं — प्रतिरक्षा एवं हृदय प्रणाली मजबूत।
  7. जैविक आयु की वृद्धि धीमी होती है — biological age बनाम chronological age में अंतर।

पोषण, स्थिरता, देखभाल, और मातृत्व-मानसिकता = दीर्घायु का आधार

जबकि,

अत्यधिक तनाव, अकेलापन, चुनौती-केंद्रित जीवन-शैली, समाज-विमुखता = वृद्धावस्था की गति तेज करती है

स्त्री-शरीर और मन ऐसे ढाँचे के साथ विकसित हुए हैं जिसमें पोषण-प्रधान जीवन स्वास्थ्य और दीर्घायु दोनों को सुदृढ़ करते हैं। जैविक धारा के विरुद्ध जाने वाले अत्यधिक व्यवहार इसके लाभों को कम कर देते हैं।

Reference

Why Women Live Longer Than Men

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