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संस्कृत गोवीथि : : गव्य २७ (साहित्य विशेष)

तीक्ष्णा नारुन्तुदा बुद्धिः कर्म शान्तं प्रतापयत्‌ । सत्पुरुषोकी बुद्धि तीक्ष्ण होती है किन्तु शस्त्रोंकी भांति मर्मभेदिनी नहीं होती| उसका कार्य ...

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संस्कृत गोवीथि : : गव्य २१ (साहित्य विशेष)

  सहसा विदधीत न क्रियामविवेक: परमापदां पदम्‌। वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धा: स्वयमेवसम्पद:॥1:30॥ [बिना सोचे-विचारे सहसा किसी काम को अंजाम नहीं ...

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