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त्वचा रक्तचाप और हृदयगति को नियंत्रित करने में आश्चर्यजनक भूमिका निभाती है — यह बात इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज और स्वीडन के करोलिन्स्का संस्थान के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट की है।
त्वचा की उपेक्षा न करें। इसका ध्यान रखें! यह आपके रक्तचाप और हृदय की गति को नियंत्रित करती है।
यह शरीर का सबसे बड़ा अंग है — अतः इसकी विशेष देखभाल आवश्यक है।
आयुर्वेद में सुझाया गया अभ्यंग (तेल-मर्दन) कोई संयोग नहीं है, यह विज्ञानसम्मत है!
मालिश या स्वेदन → प्राणवाहित त्वचा → नियंत्रित रक्तचाप और रक्तप्रवाह
प्राण के संदर्भ में सोचें। प्राण का आसन हृदय है। भोजन, जल और वायु के अतिरिक्त त्वचा-श्वसन प्राण-परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है।
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eLife नामक खुले वैज्ञानिक पत्र में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, त्वचा — जो मानव शरीर का लगभग दो वर्ग मीटर क्षेत्र घेरे रहती है — पर्यावरण में उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा के अनुसार रक्तचाप और हृदयगति को नियंत्रित करती है।
