Symbols in education

Marut

Dharma

वृक्ष, वन, गिरि, सरित, सरोवर,
गौ, अश्व, पक्षी, गृध्र, भुजंग —
ये केवल रूप नहीं,
युग-युगांतर की वाणी के प्रतीक हैं।

वेद ने इन्हीं में ढाला है
प्रकृति का रहस्यमय सत्य।
मूर्त आवरण में अमूर्त तत्त्व,
जो खुलता है केवल
ज्ञान-दृष्टि के आलोक में।

वेद-विचार प्रतीकों के साँचे में ढला है। प्रतीक वह मूर्त वस्तु है जिसके द्वारा किसी गूढ़ भाव का संप्रेषण किया जाता है। वेद में वर्णित प्रत्येक भौतिक वस्तु को उसके पीछे विद्यमान प्रकृति-तत्त्व का प्रतीक माना गया है। यह किसी अमूर्त तत्त्व का मूर्त रूप है, जो अपने नियत कार्य में गहन अर्थ संजोए रहता है।

इसलिए वेद में काव्यमय ढंग से वर्णित प्रत्येक दृश्य वस्तु — चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव-निर्मित — किसी रहस्यमय भाव का आवरण है, जिसे केवल ज्ञान-दृष्टि ही पहचान सकती है ( “भूतेषु भूतेषु विचित्य धीराः” – केन उपनिषद् 2.5 )।

यह दृष्टि से शिक्षण कार्य होना चाहिए।

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