बालविकास – भागवत दृष्टि से – भाग १

Nisarg Joshi

child-growth, Parenting

बच्चे आमतौर पर 7 से 10 महीने की उम्र के बीच रेंगना शुरू कर देते हैं। जैसे जैसे उनकी कर्मेन्द्रियों की शिथिलता दूर होती है वैसे वैसे उनके क्रीडा क्षेत्र का विस्तार होता है! आयु अनुसार यह विस्तार उनके सम्यक विकास हेतु आवश्यक है!

आजकल के घरों में, ८-१० माह के बालक को आवास के बाहर गलियों में रेंगने देना और गलियां गौ गोबर और मूत्र से भरी पड़ी हो – क्या ऐसी कल्पना आप कर सकते हो?

२१ वी सदी के मातापिता द्वारा शिशुओ को अति संरक्षात्मक वातावरण दिया जाता है और इस कारण शिशु का पूर्ण विकास नहीं हो पाता!

सीखना हो तो श्रीमद भागवत के दशम स्कन्ध से सीखे।

तावङ्‍‍घ्रियुग्ममनुकृष्य सरीसृपन्तौ
घोषप्रघोषरुचिरं व्रजकर्दमेषु ।
तन्नादहृष्टमनसावनुसृत्य लोकं
मुग्धप्रभीतवदुपेयतुरन्ति मात्रो: ॥

तन्मातरौ निजसुतौ घृणया स्‍नुवन्त्यौ
पङ्काङ्गरागरुचिरावुपगृह्य दोर्भ्याम् ।
दत्त्वा स्तनं प्रपिबतो: स्म मुखं निरीक्ष्य
मुग्धस्मिताल्पदशनं ययतु: प्रमोदम् ॥ २३

जब कृष्ण और बलराम अपने पैरों की शक्ति से व्रज में गोबर और गोमूत्र से बने कीचड़ भरे स्थानों पर रेंगते थे, तो उनका रेंगना साँपों के रेंगने जैसा लगता था और उनके घुंघरूओं की ध्वनि बहुत ही मनमोहक होती थी। दूसरे लोगों के घुंघरूओं की ध्वनि से बहुत प्रसन्न होकर वे उन लोगों के पीछे-पीछे ऐसे चलते थे मानो अपनी माताओं के पास जा रहे हों, लेकिन जब उन्होंने देखा कि ये दूसरे लोग हैं, तो वे डर गए और अपनी असली माताओं, यशोदा और रोहिणी के पास लौट गए।

गोबर और गोमूत्र से सजी मिट्टी से सजे ये बच्चे बहुत सुंदर लग रहे थे और जब वे अपनी माताओं के पास गए तो यशोदा और रोहिणी ने उन्हें बड़े प्यार से उठाया, गले लगाया और अपने स्तनों से बहते दूध को पीने दिया। स्तन चूसते समय बच्चे मुस्कुराए और उनके छोटे-छोटे दांत दिखाई दिए। उन सुंदर दांतों को देखकर उनकी माताओं को बहुत दिव्य आनंद मिला।

यह वातावरण, गोबर और मूत्र से सजना मात्र अवतार के लिए नहीं! यह प्रत्येक शिशु का जन्मसिद्ध अधिकार है! ऐसे वातावरण के अभाव में ही आज एक पूरी की पूरी पीढ़ी एंटीबायोटिक खा कर निर्बल और बीमार रूप में बढ़ रही है!

यह कुछ पुराने लेख है जहां मिट्टी, गोबर का महत्व स्थापित किया है।

Walking barefoot daily: One life habit you cannot ignore

https://prachodayat.in/walking-barefoot-daily-one-life-habit-cannot-ignore/

Exposure to Environmental Microorganisms and Childhood Asthma

https://prachodayat.in/indulge-farm-dirt/

Childhood Dirt Exposure, Latent Viruses and Immunity

https://prachodayat.in/childhood-dirt-exposure-latent-viruses-immunity/

Newborns exposed to dirt, dander and germs may have lower allergy and asthma risk

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