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Hanumannatak
Hanumannatak

हनुमन्नाटक संवत १६२३ में संस्कृत भाषा मे रचित कवि हृदयराम द्वारा रचित भगवान राम के जीवन पर आधारित धार्मिक ग्रन्थ हैं। श्री बाली के अनुसार हृदयराम पंजाबी थे, तथा उनके “हनुमन्नाटक” को गुरु गोविन्द सिंह सदा अपने साथ रखते थे। इससे सीखो में भी बड़ा सम्मान हैं। पूरा ग्रन्थ लगभग डेढ़ हजार छंदों में समाप्त हुआ हैं। “हनुमन्नाटक” में हनुमान का चरित नहीं, अपितु भगवान राम का जीवन वृत्त, जानकी-स्वयंवर से लेकर राज्याभिषेक तक प्रस्तुत है।

There is one scene in this play where Ravana ponder upon burning Lanka that how come Hanuman, A Rudra Avatar, can burn creation of Rudra Bhakt?

Ravana Uvach
Ravana Uvach

Then he replied to self: “My 10 faces worshiped 10 forms of Rudra but the 11th one could not be worshiped.”

Hanuman is 11th Rudra.

Siddhi-focused SAdhna? Avoid.

There is no full stop in Sadhna. Keep walking on the path.

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