
कुछ दिन पूर्व , लिखा तहत की जीतने प्राणधारी उतने है गणपति ।
गणेश जी की शुंड कर सीधा संदर्भ प्राणायाम से है । कुछ लोगों को सूर्य नाड़ी (right nostril breathing) की आवश्यकता है तो कुछ को चंद्र नाड़ी(left nostril breathing)
दक्षिणायन काल ही चंद्र साधना से मानसिक तप बढ़ाने का । एक के बाद एक सोम साधना से अग्नि प्रज्ज्वलित करने के प्रयास (ब्रह्मांड अग्निसोमात्मक है । अग्नि से सोम और सोम से अग्नि की उत्पत्ति है) । गणेश साधना, पितृ साधना, नवरात्र, शरद पूर्णिमा, दीपावली।
Right one to balance the stupor ones. (सूर्य नाड़ी प्राणायाम) – देव तृप्ति
Left one to balance hyper active ones. (चंद्र नाड़ी प्राणायाम) – पितर तृप्ति
At least शुण्ड-long breathing.
गणेश उत्सव के बाद है पितृ पक्ष । पितर का संबंध है चंद्र से । सोम से ।
