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gm

One of the prime reasons mentioned by Acharya ji in this video. It is rotten food system responsible for so many of us pretending of sleeping.

For last 60 years or so, this fertile land’s custodians were fooled or forced by govt/politicians/paid scientists and MNCs. They were made to believe that applying chemicals in agriculture is must and cool thing to do. All presented by modernism is spotless without any side-effects. Toxic fruits are ripe now.

दोष is not just in how we grow food but how we handle it, exchange it, cook it and have it! At all stages, we have started disrespecting it.

खादन्न गच्छामि हसन्न जल्पे
गतं न शोचामि कृतं न मन्ये ।
द्वाभ्यां तृतीयो न भवामि राजन्
किं कारणं भोज भवामि मूर्खः ॥

 
O King! I never eat while standing or walking, never speak while laughing, never repent for what is gone in past, never boast for my achievements, never interfere in others talk, then how can you say I am fool?
 
हे भोज ! मैं खड़े खड़े या चलते चलते खाना खाता नहीं,; हँसते हँसते बोलता नहीं हूँ; बीते हुए का शोक नहीं करता; किये हुए का अभिमान नहीं करता; दो लोग बात करते हो, तब बीच में तीसरा नहीं बनता; तो फिर किस कारण से मैं मूर्ख बना ?

जब हम किसी सुविधा के आदी (गुलाम) हो जाते है या जब कोई चीज प्रतिष्ठा का प्रश्न बना दी जाती है या जब कोई चीज घर घर में पहुँच जाती है, तब वह चाहे कितनी भी अवैज्ञानिक क्यों न हो कितने ही रोग पैदा कराने वाली क्यूँ न हो , हम अपने मानसिक विकारों (लत,दिखावा, भेड़चाल आदि) के कारण उसकी असलियत को जानना ही नहीं चाहते है और यदि कोई बता दे तो वही व्यक्ति को हम दक़ियानूसी मानते है और इन मानसिक विकारों के कारण हमारे दिमाग मे सेकड़ों तर्क उठने लगते है, हमारी हर परम्पराओं मे वैज्ञानिकता थी हम भारतियों ने जड़ विज्ञान की अपेक्षा चेतन्य विज्ञान पर अधिक बल दिया और चेतन्य के आगे जड़ कही नहीं टिकता आज के युवा कब समझेंगे ?

खड़े होकर भोजन करने से हानियाँ : ( Buffet System’s disadvantage )

– खड़े होकर भोजन करने से निचले अंगों में वात रोग (कब्ज, गैस, घुटनों का दर्द, कमर दर्द आदि) बढ़ते है, और कब्ज बीमारियों का बादशाह है ।

– खड़े होकर भोजन करने से यौन रोगो की संभावना प्रबल होती है, जिसमे नपुंसकता, किडनी की बीमारियाँ, पथरी रोग

– पैरो में जूते चप्पल होने से पैर गरम रहते है जबकि आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय पैर ठंडे रहने चाहिए, इसलिए हमारे देश में भोजन करने से पहले हाथ के साथ पैर धोने की परंपरा है !

– बार बार कतार मे लगने से बचने के लिए थाली को अधिक भर लिया जाता है जिससे जूठन अधिक छोडी जाती है, और अन्न देवता का अपमान है, खड़े होकर भोजन करने की आदत असुरो की है भारतीयों की नहीं ।

-From bharat swabhiman trust meterial

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