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Part 2 of Article : https://www.facebook.com/skv.green.oxford/posts/1713409982119652?__tn__=K-R

#भारत_में_पैकेट_बंद_दूध: आओ हम सब मिलकर जहर पियें!! भाग 2

मूल लेख: डॉ श्री सुनील वर्मा
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बाबा सही कहते हैं – भेड!

सुनो, मेरा आलेख “भारत में पैकेट बंद दूध: आओ हम सब मिलकर जहर पियें!!” पढ़ कर कुछ भेड़ों ने क्या क्या कहा –

कोई बोला तथ्य गलत हैं, परन्तु पलट कर सही तथ्य पेश नही कर पाया|

कोई बोला ऐसा तो इंडिया में नहीं होता, हो ही नही सकता |

एक स्कूल के मास्टर जी तो, जो आज तक शायद प्रोटीनेक्स के डिब्बे के पाउडर को ही प्रोटीन मानतें है बहस पर उतर आये – कि मेलामाइन और प्रोटीन का क्या लिंक | मेलामाइन मिलाने से प्रोटीन कैसे बढ़ जायेगी और वो मुझे प्रोटीन दुबारा जाकर पढने का ज्ञान देने लगे |

मैंने उन भेड मास्टरजी को बहुत समझाया कि मास्टर जी मेलामाइन में प्रोटीन नहीं होती पर उसमें नाइट्रोजन होती है भरपूर 67% |

और मिल्क में प्रोटीन टेस्ट करने का FSSAI द्वारा जो तरीका approve है उसे कहते है Kjeldahl method | और इस मेथड में मिल्क में उपस्थित प्रोटीन को डायरेक्ट नहीं नापा जाता वरन इसे नापने के लिए पहले दूध की प्रोटीन को कुछ केमिकल जैसे सल्फ्यूरिक एसिड मिलाकर आर्गेनिक नाइट्रोजन में तोड़ा जाता है और फिर उस आर्गेनिक नाइट्रोजन की मात्रा को आगे के स्टेप्स में नापा तौला जाता है|

जितनी भी नाइट्रोजन आई उसको 6.38 से गुणा कर दिया जाता है और यही मानी जाती है मिल्क में उपस्थित प्रोटीन की मात्रा |

और शैतान खोपड़ी इस टेस्ट को गच्चा देने के लिए दूध में डायरेक्ट नोन प्रोटीन नाइट्रोजन का सोर्स जैसे कि मेलामाइन, यूरिया खाद इत्यादि मिला देता है, ताकि प्रोटीन एस्टीमेशन का FSSAI का मानक टेस्ट Kjeldahl method गच्चा खा जाये और दूध में प्रोटीन न होते हुए भी प्रोटीन की रीडिंग खूब आये |

पर उन भेड़ जी को ना तो मानना था ना वो माने उलटा हमारी ऑक्सफ़ोर्ड की डिग्री को कोसने लगे|

भाई मास्टर जी ऑक्सफ़ोर्ड ने आपका क्या बिगाड़ दिया आपको नहीं समझना ना समझो, ना पढो आगे बढ़ लो| और बहुत लोग पढ़ भी रहे हैं, समझ भी रहे है और चिंतन भी कर रहे हैं|

तो मित्रों, आगे चले…..

वैसे सबकी ईगो को संतुष्ट करना संभव नहीं होता, पर जो बेचारे आदत से मजबूर है कि अपने लोगो की नहीं सुणनी सिर्फ गोरी चमड़ी की सुननी हैं, वो सुने –

5 सितम्बर 2018 की प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की न्यूज़ है – WHO ने कहा है कि “भारत में अगर दूध में मिलाये जाने वाले खतरनाक जहरों की तुरंत रोकथाम नहीं की गयी तो वर्ष 2025 (अर्थात मोदी जी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने तक) भारत में 87% सिटीजन अर्थात लगभग सौ करोड़ लोग कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के शिकार हो जायेंगे!!” गूगल करके ढूंड लो इस न्यूज़ को आप लोग|

और इन 87% बीमारू लोगो में मिलावट करने वाले और उनके खुद के बच्चे भी होंगे, और मिलावट का दूध पीने वाले भी!

पूरे देश को एक साथ ख़त्म करने की साजिस है यह, अभी भी वक़्त है समझ जाओ मेरे भाई!!

मेलामाइन तो बस एक जहर है जो मैंने बताया, इसके अलावा भारत में दूध में मिलाया जा रहा है कास्टिक सोडा दूध को पानी, यूरिया, मेलामाइन इत्यादि डालने के बाद अधिक झागदार बनाने के लिए!

वही कास्टिक सोडा जो कपडे धोने की साबुन में मिलाया जाता है | इसका एक कण भी लैब में कोशिका के ऊपर गिर जाए तो यह कण गोली की तरह छेद करके अन्दर घुस जाता है और कोशिका को फोड़ डालता है |

सोचिए, नन्हे मुन्हों के पेट में यह कास्टिक सोडा जाएगा तो क्या होगा ? अल्सर हो जायेंगे पेट में!!

और भारत में दूध में डाला जा रहा है यूरिया!

हाँ जी यूरिया खाद! वह भी मेलामाइन का छोटा भाई है इसमें से भी नाइट्रोजन निकलती है जो फर्जी तरीके से प्रोटीन की ज्यादा मात्रा का आभास कराती है और प्रोटीन टेस्ट को गच्चा देती है |

प्रोटीन टेस्ट तो गच्चा खा जाता है भाई | पर आपका पेट तो गच्चा नहीं खायेगा ना !! यूरिया नीचे ऊपर हर तरफ के छेदों में से निकलेगा बाहर|

और सुनो – एक लीटर दूध में 700 mg यूरिया FSSAI ने लीगल कर रखा है ! गूगल कर लो !

मतलब अगर पहलवान जी ने डेढ़ लीटर दूध पी लिया तो 1 ग्राम यूरिया खाद रोज उनके शरीर में लीगली पहुच गयी!

वो भी तब अगर दूध FSSAI के मानकों के अनुसार खरा दूध है और अगर खरा नहीं है तो कितनी यूरिया गयी किसी को नहीं पता!!

और आपके दूध में मिलाया जाता है हाइड्रोजन proxide| जी हाँ वही हाइड्रोजन proxide जिसे कान में डाला जाता था पहले जमाने में कान साफ़ करने के लिए !

झूम झूम कर झाग उबलने लगता था कान में से और उसके साथ कान का मैल बाहर!

हाइड्रोजन proxide को शैतान खोपड़ी मिलाता है दूध को ज्यादा दिन चलाने के लिए ताकि वह सड़े नहीं ! यह H2O2 आपके पेट में जाकर जो झाग उठाता होगा न, वो आपका पेट ही जाणता है !

और आपके दूध में मिलाया जाता है फोर्मलिन! जी हाँ, वही फोर्मलिने जिसमें आपकी जीव विज्ञान की प्रयोगशाला में छोटे छोटे मरे हुए कीड़े मकोडो मेढको को preserve करके रखा जाता है कांच की बोतलों में|

फोर्मलिन की थोड़ी सी मात्रा भी कोशिका के ऊपर पड जाए तो उसकी मेम्ब्रेन प्रोटीन में क्रॉस लिंकिंग हो जाती है और कोशिका मुर्दे की तरह अकड जाती है और मर जाती है!

शैतान खोपड़ी फोर्मलिन इसलिए मिलाता है कि दूध में उपस्थित बैक्टीरिया मर जाएँ और वह अनंत काल तक पकैट में न सडे! बस बिकता रहे !

मैंने खुद देखा है आपने भी देखा होगा कि कुछ ब्रांड का पैकेट बंद दूध गरम न करो तो शाम तक फट जाता है और कुछ ब्रांड ऐसे होते हैं कि बाहर भी छोड़ दो चार दिन, कुछ नहीं होगा दूध नहीं फटेगा |

ऐसा क्या जादू है इस दूध में? जादू नहीं मेरे भाई, इसमें फोर्मलिन है !

इस फोर्मलिन ने दूध के सारे बैक्टीरिया को मार दिया है, अब जब यह तुम्हारे पेट में जायेगा तो तुम्हारे पेट की कोशिकाओं को चुन चुन कर मारेगा|

फोर्मलिन लगते ही वो ऐठ कर अकड जायेंगी मुर्दे की तरह | और फिर स्लोली स्लोली तुमको हो जायेगा अपेंडिक्स का दर्द, अल्सर और आंत का कैंसर!!

जहाँ तक मेरी जानकारी है इस फोर्मलिन की मानक अभी तक FSSAI ने decide नहीं किया है!

और वो जो रेत में सर देकर जी रहे हैं और कहते हैं कि हम तो पीते है पैकेट का दूध – हमे कुछ नही होता | सुने –

वर्ष 2012 की FSSAI की ही रिपोर्ट है, गूगल पर ढूंढ लो | उन्होंने खुद पुरे देश से 1791 सैंपल दूध के उठाये और पाया कि सिर्फ 31.5% sample FSSAI के महान मानको के अनुसार थे और बाकी के सब (68.4%) भगवान् बागड़ बिल्ला साईं महाराज असेंबली ऑफ़ गॉड के भरोसे थे, अर्थात उन में पेल कर यूरिया था, मैलामाइन था, फोर्मलिन था और न जाने क्या क्या था !! व्हाइट पेंट भी था, हां वही दीवार पर पोतने वाला उजला उजला पेंट।

इसका मतलब 1० में से 3 लोग तो आज FSSAI का मानक धारी दूध पीता है इंडिया, और 7 लोग जहर वाला दूध पीता है इंडिया !! इस सात में आप और आपके बच्चे न हो, यह जरुरी तो नहीं !

पोस्ट बड़ी हो रही है| मैंने प्रॉमिस किया था कि मैलामाइन का समाधान बताऊंगा | समाधान तैयार है परन्तु भारत में बिकने वाले दूध में और क्या क्या जहर मिला हुआ है यह न बताता तो कथा अधूरी रह जाती |

आगे की कथा, समाधान के साथ – अगले भाग में !!

क्रमश:…

डॉ सुनील वर्मा

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