सुभाषित

सुभाषित

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : त्रयोदशी)

subhashita_29-1-18

Do you know why we, with dharmic legacy, are not yet united?

Research : Greed and fear hamper cooperation

 

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
त्रयोदशी – २५:५३+ तक
 शिशिर
 सोमवासर:

नित्य सुभाषित : तन्नो सरस्वती प्रचोदयात : कृष्ण पक्ष : सप्तमी

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#अतुल्यसंस्कृत श्रेणी अंतर्गत, नित्य सुभाषित

कस्तूरी जायते कस्मात्को हन्ति करिणां शतम् |
किं कुर्यात्कातरो  युद्धे मृगात्सिंहः  पलायनम्    ||

उपर्युक्त श्लोक ‘सुभषितरत्नाकर ‘ में ‘अन्तर्लापिका’ शीर्षक के अन्तर्गत संकलित है |  अन्तर्लापिका का तात्पर्य यह है कि उसमे पूछी गयी  पहेली  का उत्तर उसी  में छिपा होता है, यद्यपि ऐसा प्रथम दृष्ट्या विदित  नहीं होता है|

Literal meaning –   Where is kastoori produced, who kills hundreds of elephants and what a coward does in a battle, From deer the Lion runs away ?
The answer is hidden in the last three words of the Shloka.. i.e  Musk is produced by the musk deer,  the lion kills the elephants and the coward runs away from the battlefield.

Subhashita_1

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : त्रयोदशी-संक्रान्ति)

subhashita_14-1-18

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
त्रयोदशी – २६:३०+ तक
 शिशिर ऋतू
 रविवार

समृद्धि / prosperity is mandatory necessity emerge and remain as strong nation. No prosperity, no nation. Civil war. Infighting. Corruption. Crimes.

Let us, all together, strive for ethical, decentralized, local wealth!

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : चतुर्दशी-मासिक शिवरात्रि)

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शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
 शिशिर
 सोमवार

One of the wealth I aspire to achieve in this life is, rock solid, forever friendship with 10 friends. Friendship is everything. सखत्व is over and above all relations.

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : अमावस्या)

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Planting trees is very sacred activity. Don’t do it zombie way, for clicking selfie! Today, it is उत्तराषाढा नक्षत्र. FIXED constellation and is favourable for planting tree!

 

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
अमावस्या – ०७:४७ तक
 शिशिर ऋतू
 बुधवार

Read old notes on tree plantation.

Plant wisely, plant native : Don’t go chasing Guinness world records

संस्कृत गोवीथि : : गव्य ४० (पुराण विशेष) :: वृक्ष प्रतिष्ठा

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : एकादशी)

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I was studying sequence of our festivals. One sequence was very interesting. Very very interesting. High respect for social scientists who designed it. Bow to societies who followed it.
 
वसंत पंचमी followed by भीष्म-अष्टमी & भीष्म-एकादशी.
 
Hint: शास्त्रोक्त काम i.e. Regulated Kama, ब्रह्मचर्ययुक्त काम is to be used for progeny generation. भीष्म is epitome of ब्रह्मचर्य. वसंत is a season of procreation. भीष्म-अष्टमी & भीष्म-एकादशी in माघ is not mere coincidence. Perform regulated Kama!
 
गंगापुत्र भीष्म – Son of Maa Ganga.
 
Ganga means त्रिदोष समता. Balance of Kapha, Pitta, Vayu. That nectar which causes balance Prkriti.
 
भीष्म is possible when there is समता.
 
Brahmcharya is natural when there is समता. Or in other words, समता causes Brahmcharya.
 
Those who wants to observe Brahmcharya for spiritual Sadhana, must strive for त्रिदोष समता along with mental practices and Pranic practices.

Worship Maa Ganga daily!


अतीव  बलहीनं  हि  लङ्घनं  नैव  कारयेत्  |
ये गुणा: लङ्घने प्रोक्तास्ते गुणा: लघुभोजने.||

अर्थ –      अत्यन्त दुर्बल व्यक्तियों को उपवास कभी नहीं करना चाहिये  |  उपवास में जो गुण हैं वे सभी गुण कम और सुपाच्य भोजन करने में भी होते हैं |

(आयुर्वेद का एक सिद्धान्त है कि – ‘लङ्घनं परमौषधम् ‘  अर्थात उपवास करना एक प्रभावशाली औषधि के सेवन के समान है और उपवास करने  से कई प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं | परन्तु इस सुभाषित के अनुसार अत्यन्त दुर्बल व्यक्तियों के लिये उपवास करना निषिद्ध है | वैसा  ही लाभ वे थोडा और सुपाच्य भोजन कर के भी प्राप्त कर सकते हैं )

(In  Ayurveda (the Indian system of medicine) it is said that fasting acts like a very potent medicine in many diseases.  However through the above Subhashita the author has advised  very weak and aged persons no to do any fasting., because they can get all the benefits of fasting by having a light  and easily digestible meal.)

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
एकादशी
 शिशिर
 शनिवार

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : द्वितीया)

subhashita_19-1-18Being young is precondition for being scholar and devotee. Without mental and physical toughness, one cannot justify being scholar or devotee. And if you are striving to be one, you will actually stay young forever!

इदं ते चारु सञ्जातं यौवनं व्यतिवर्तते।
यदतीतं पुनर्नैति स्रोतः शीघ्रमपामिव।|

“Your charming youth should not pass away (uselessly). A past event does not come back like a current of stream.”

May we remain young forever, may we don’t waste our youngness!

सनातन युवा ‘Sanaatan Yuvaa’ !

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
द्वितीया – १२:२२ तक
 शिशिर ऋतू
 शुक्रवार

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : चतुर्दशी)

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Today, January 30, day when most Indians are served yearly dosage of fake notion of अहिंसा. Don’t be victim of fake kindness. Show your anger, strength and reaction, wherever धर्म-ग्लानि is happening.

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
चतुर्दशी – २२:२२ तक
 शिशिर
 मंगलवार

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : विनायक चतुर्थी)

subhashita_21-1-18

 

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
चतुर्थी – १५:३३ तक
 शिशिर ऋतू
 रविवार

via : http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1979/October/v2.25

भौतिक-समृद्धि स्थूल साधनों से उपलब्ध होती है। आत्मिक-सिद्धि के लिए कुछ अन्य ही साधन अपेक्षित होते हैं। आत्म-साक्षात्कार- ईश्वर-साक्षात्कार के साधनों की विवेचना जहाँ भी हुई, उसमें श्रद्धा को प्रमुख माना गया है। श्रद्धा-तत्व के विकास द्वारा ही परमात्मा की अनुभूति कर पाना सम्भव होता है।

श्रद्धा का तात्पर्य उन भावनाओं अथवा आस्थाओं से है, जो अपने गुरुजनों या इष्ट के प्रति पूज्य-भाव एवं सघन आत्म भाव बनाये रखती हैं। महापुरुषों के वचनों पर विश्वास करके, उनके द्वारा उपदिष्ट मार्ग पर बढ़ सकना श्रद्धा द्वारा ही सम्भव हो पाता है। जिनके प्रति श्रद्धा के भाव नहीं होते, उनके कथन पर विश्वास कर पाना-उनके द्वारा बताये मार्ग पर चल पाना असम्भव ही रहता है। ‘श्रद्धा’ सत् तत्व के प्रति ही सघन होती है, असत् के प्रति नहीं। श्रेष्ठता का समावेश जहाँ भी होता है, श्रद्धा वहीं टिकती है, अन्यत्र नहीं। वस्तु स्थिति प्रकट होने पर श्रेष्ठता का पाखण्ड जैसे ही ध्वस्त होता है अपने साथ श्रद्धा को भी विनष्ट कर देता है। परमात्मा के प्रति श्रद्धा न डिगने का कारण उसके अस्तित्व एवं अनुग्रह के प्रति तनिक भी आशंका का न होना ही है। जिसके मन में संदेह या अविश्वास रहता है, उनकी श्रद्धा भी ईश्वर के प्रति गहन नहीं हो पाती प्रगाढ़ श्रद्धा तो मिट्टी में भी भगवान का दर्शन करा देती है। एकलव्य द्वारा मिट्टी के द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या में पारंगत हो पाना श्रद्धा का ही चमत्कार कहा जा सकता है।

श्रद्धा द्वारा कुछ भी दुर्लभ नहीं होता है-

श्रद्धयाग्निः समिध्यते श्रद्धया हूयते हविः। श्रद्धया भगस्य मूर्धनि वचसा वेदयामसि॥ ऋ10।1511

‘श्रद्धा’ से अग्नि का प्रदीप्त किया जाना सम्भव होता है अर्थात् आत्मज्ञान की अग्नि श्रद्धा द्वारा हविष्यान्न का हवन किया जाता है अर्थात् आत्मा सत्ता को परमात्मा-सत्त, में विलय कर पाना श्रद्धा द्वारा ही सम्भव हो पाता है। श्रद्धा भग (ऐश्वर्यादिकों) के सिर पर होती है, अर्थात् सभी ऐश्वर्यों की प्राप्ति श्रद्धा का सत्परिणाम है। ऐश्वर्यादिक भग छः होते हैं-

एश्यवर्यस्य समग्रस्य धर्मस्य यशसः श्रियाः। ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णाँ भग इतीरिणा॥

ऐश्वर्य, धर्म, यश, क्षी (समृद्धि ) ज्ञान और वैराग्य-छहों को भग कहा जाता है श्रद्धा का इनमें मूर्धन्य होने का तात्पर्य है, श्रद्धा का इन पर नियन्त्रण होना। श्रेय साधक में सर्वप्रथम श्रद्धा ही प्रबल होती है, तत्पश्चात् क्रिया शीलता आती है और अन्ततः ऐश्वर्यादिकों की उपलब्धि होती है।

गीताकार श्रद्धा द्वारा आत्मज्ञान की प्राप्ति का तथ्य प्रकट करता है।-

श्रद्धा वाँल्लभते ज्ञानम्। गीता-4-38

श्रद्धावान व्यक्ति ही ज्ञान प्राप्त करता है।

योग-मार्ग के पथिकों की रक्षा’श्रद्धा’ के बलबूते ही सम्भव होती है, अन्यथा वे विघ्न-प्रलोभन उसे कभी का पथ भ्रष्ट कर देते, जो इस मार्ग में प्रायः आया करते है।

योग-दर्शन के व्यास-भाष्य में लिखा है-

सा (श्रद्धा) जननीव कल्याणं योगिन पाति।

ईश्वरानुभूति के अन्य साधन उतने सफल नहीं होते, जितना श्रद्धा की प्रगाढ़ता। याज्ञिक और योगी सर्वे प्रथम श्रद्धा की ही उपासना करते हैं क्योंकि वे इसके सत्परिणामों को जानते हैं। श्रद्धा अपनी चरम परिणिति ईश्वर साक्षात्कार के रूप में प्रकट करती है।

विनायक चतुर्थी

विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं। जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास करते हैं भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण है जिसका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है। जिस मनुष्य के पास यह गुण हैं वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनवान्छित फल प्राप्त करता है।

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन गणेश पूजा दोपहर को मध्याह्न काल के दौरान की जाती है। दोपहर के दौरान भगवान गणेश की पूजा का मुहूर्त विनायक चतुर्थी के दिनों के साथ दर्शाया गया है।

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ/फाल्गुन कृष्ण पक्ष : प्रतिपदा)

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सनातन संस्कृति lives forever due to two principles established in her subjects.

  1. Learning and 2. Teaching

One should always  indulge in learning and teaching , this is the asset our elders have passed on to us from the time infinite. We are blessed with being born in a country like भारत which has the precious heritage and the great people who speak the language of gods.

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
फाल्गुन – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
प्रतिपदा – १५:४३ तक
शिशिर
 गुरूवार

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