सुभाषित

सुभाषित

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : तृतीया)

subhashita_20-1-18

कोई भी संचय करनेवाला उपद्रव-मुक्त नहीं दिखाई देता| This is very easy to understand by example of over-eating or use of chemical fertilizers in agriculture land. Too much accumulation nutrients, soil wealth = trouble for decades to come.

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
तृतीया – १४:१० तक
 शिशिर ऋतू
 शनिवार

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : द्वादशी-लोहड़ी)

subhashita_13-1-18

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
द्वादशी – २३:५२ तक
 शिशिर ऋतु
 शनिवार

शनिवार – द्वादशी – लोहड़ी

Who is Hanuman?

पवनपुत्र हनुमान
पवन शब्द का अर्थ है पवित्र करने वाला। यथा पुनाति इति पवनः।
वायोरग्निः (तै.उ. २-१-१)
पवनपुत्र अग्नि.
हनुमान – अग्नि personified.

Daily Sandhya + Sun Exposure + Ventilated home and workplace + Everyday Homa : Essential for physical and mental purification! 

 

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : दशमी )

subhashita_11-1-18

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
दशमी – १९:१० तक
 शिशिर ऋतु
 गुरूवार

हर्षशोकान्वितः – राजसिक or तामसिक स्वभाव.

रागी कर्मफलप्रेप्सुर्लुब्धो हिंसात्मकोऽशुचिः।
हर्षशोकान्वितः कर्ता राजसः परिकीर्तितः।।18.27।।

Passionate, desiring to obtain the reward of actions, greedy, cruel, impure, moved by joy and sorrow, such an agent is said to be Rajasic (passionate).

यया स्वप्नं भयं शोकं विषादं मदमेव च।
न विमुञ्चति दुर्मेधा धृतिः सा पार्थ तामसी।।18.35।।

That, by which a stupid man does not abandon sleep, fear, grief, despair and also conceit that firmness, O Arjuna, is Tamasic.

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : चतुर्दशी-मासिक शिवरात्रि)

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शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
 शिशिर
 सोमवार

One of the wealth I aspire to achieve in this life is, rock solid, forever friendship with 10 friends. Friendship is everything. सखत्व is over and above all relations.

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : द्वितीया)

subhashita_19-1-18Being young is precondition for being scholar and devotee. Without mental and physical toughness, one cannot justify being scholar or devotee. And if you are striving to be one, you will actually stay young forever!

इदं ते चारु सञ्जातं यौवनं व्यतिवर्तते।
यदतीतं पुनर्नैति स्रोतः शीघ्रमपामिव।|

“Your charming youth should not pass away (uselessly). A past event does not come back like a current of stream.”

May we remain young forever, may we don’t waste our youngness!

सनातन युवा ‘Sanaatan Yuvaa’ !

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
द्वितीया – १२:२२ तक
 शिशिर ऋतू
 शुक्रवार

दैनिक सुभाषित पंचांग (पौष/माघ कृष्ण पक्ष : नवमी)

subhashita_10-1-18

 

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
पौष – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
कृष्ण पक्ष
तिथि:
नवमी – १७:२५ तक
 बुधवार

Food shouldn’t be cooked for self alone. Sanatana Sanskruti prescribes to cook for समष्टि, for all. Keeping aside food for cow, dog, birds is our normal practice. Don’t ignore it. Before eating food, offer it to देवगण & पितृ.

Community Kitchen. If not daily, once a week?

Cook together,eat together and serve those who are really in need! Serve the same food as you eat.

No name, no fame but silent concrete work.

Who really needs NGO? Work in manageable small tribes.

Food is a strongest medium to strengthen & protect dharma.

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : नवमी/दशमी)

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राष्ट्र भावना – अदृश्य प्रगाढ़ सूत्र

भारत राष्ट्र – एक अमर संकल्पना

 

सामाजिक और राष्ट्रीय कर्तव्योंका विनियोग = यज्ञ

 

राष्ट्र सेवा : Contribute by Strong and mighty progeny

प्रजा-आधीन राजा,राष्ट्र-प्रेमी प्रजा

 

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
नवमी – १३:३१ तक
 शिशिर
 शुक्रवासर:

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : सप्तमी)

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Today, it is day to worship Sun! If you are suffering from any diseases, start worshiping Sun from Today with resolution to get rid of diseases. I am 100% sure for improvement as it is the Sun who controls our part of the universe with a mission to restore the truth/stability in all forms of life, including us.
 
भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में सूर्योपासना का अत्यधिक महत्व है ।
 
रथसप्तमी : भगवान सूर्य देव को समर्पित “रथ सप्तमी” का व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है इस दिन किए गए स्नान, दान, होम, पूजा आदि सत्कर्म हजार गुना अधिक फल देते हैं।
 
शास्त्रों में सूर्य को आरोग्यदायक कहा गया है इनकी उपासना से रोग मुक्ति का उपाय बताया जाता है | माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से संबंधित कथा का उल्लेख ग्रंथों में मिलता है | कथा के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था | अपने इसी अभिमान के मद में उन्होंने दुर्वसा ऋषि का अपमान कर दिया और शाम्ब की धृष्ठता को देखकर उन्हों ने शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया | तब भगवान श्रीकृष्ण ने शाम्ब को सूर्य भगवान की उपासना करने के लिए कहा | शाम्ब ने आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना करनी आरम्भ कर दी जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने कष्ट से मुक्ति प्राप्त हो सकी इसलिए इस सप्तमी को सके दिन सूर्य भगवान की आराधना जो श्रद्धालु विधिवत तरीके से करते हैं उन्हें आरोग्य, पुत्र और धन की प्राप्ति होती है |
शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
सप्तमी – १६:१६ तक
 शिशिर
 बुधवासरः

Below content is via www.drikpanchang.com

Saptami Tithi is dedicated to Lord Surya. Shukla Paksha Saptami in Magha month is known as Ratha Saptami or Magha Saptami. It is believed that Lord Surya Dev started enlightening the whole world on Ratha Saptami day which was considered as birth day of God Surya. Hence this day is also known as Surya Jayanti.

Ratha Saptami is highly auspicious day and it is considered as auspicious as Surya Grahan for Dan-Punya activities. By worshipping Lord Surya and observing fast on this day one can get rid of all type of sins. It is believed that seven types of sins done, knowingly, unknowingly, by words, by body, by mind, in current birth and in previous births are purged by worshipping Lord Surya on this day.

On Ratha Saptami one should take bath during Arunodaya. Ratha Saptami Snan is one of the important rituals and is suggested during Arunodaya only. Arunodaya period prevails for four Ghatis (approx. one and half hour for Indian locations if we consider one Ghati duration as 24 minutes) before sunrise. Taking bath before sunrise during Arunodaya keeps one healthy and free from all types of ailments and diseases. Because of this belief Ratha Saptami is also known as Arogya Saptami. Taking bath in water body like river, canal is preferred over taking bath at home. DrikPanchang.com lists Arunodaya period and sunrise time for most cities across the globe.

After taking bath one should worship Lord Surya during sunrise by offering Arghyadan (अर्घ्यदान) to Him. Arghyadan is performed by slowly offering water to Lord Surya from small Kalash with folded hand in Namaskar Mudra while facing Lord Sun in standing position. After this one should light Deepak of pure Ghee and worship Sun God with Kapoor, Dhup, and red flowers. By doing morning Snan, Dan-Punya and Arghyadan to Suryadev one is bestowed with long life, good health and prosperity.

 

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : प्रतिपदा : गुप्त नवरात्रि प्रारम्भ)

subhashita_18-1-18

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
प्रतिपदा – १०:१२ तक
 शिशिर
 गुरुवार

There is no alternative to hard work. For self-realization, to get the answer for ‘Who am I?’ or to achieve the goal of human birth, we must act. If we act tirelessly, selflessly, Deva(s) come to help us.

In Gita, it is said:

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत् । आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥

अर्थात् “मनुष्य को अपना उद्धार आप ही करना चाहिए । अपने आप को गिराना नहीं चाहिए । मनुष्य स्वयं ही अपना बन्धु और स्वयं ही अपना बैरी भी है ।”


गुप्त नवरात्रि

18 जनवरी (बृहस्पतिवार) 2018 : घट स्थापन एवं माँ शैलपुत्री पूजा

19 जनवरी (शुक्रवार ) 2018 : माँ ब्रह्मचारिणी पूजा

20 जनवरी (शनिवार ) 2018 : माँ चंद्रघंटा पूजा

21 जनवरी (रविवार ) 2018: माँ कुष्मांडा पूजा

22 जनवरी (सोमवार) 2018 : माँ स्कंदमाता पूजा

23 जनवरी (मंगलवार ) 2018: माँ कात्यायनी पूजा

24 जनवरी (बुधवार) 2018: माँ कालरात्रि पूजा

25 जनवरी (बृहस्पतिवार )2018: दुर्गा अष्टमी एवं माँ महागौरी पूजा

26 जनवरी (शुक्रवार ) 2018: माँ सिद्धिदात्री नवरात्री पारण

दैनिक सुभाषित पञ्चाङ्ग (माघ शुक्ल पक्ष : पूर्णिमा)

subhashita_31-1-18

शक सम्वत:
१९३९ हेमलम्बी
चन्द्रमास:
माघ – अमांत
विक्रम सम्वत:
२०७४ साधारण
माघ – पूर्णिमांत
गुजराती सम्वत:
२०७४
पक्ष:
शुक्ल पक्ष
तिथि:
पूर्णिमा – १८:५६ तक
शिशिर
 बुधवार

Moon Festivals and Saubhagya(अखंड सौभाग्य)

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